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मथुरा की ईदगाह मस्जिद परिसर को सील करने के लिए दायर की गई याचिका

मथुरा में भी ईदगाह मस्जिद परिसर को सील करने के लिए दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मस्जिद स्थित गर्भगृह के साथ मंदिर के पुरातात्विक अवशेष को क्षतिग्रस्त किया जा सकता है अगर हिंदू अवशेषों को मिटा दिया तो विवादित स्थल का करेक्टर ऑफ प्रॉपर्टी चेंज हो जाएगा।

वाराणसी चल रहे ज्ञानवापी मस्जिद के कोर्ट सर्वे के बाद अब मथुरा में भी विवादित ईदगाह मस्जिद परिसर को सील करने के लिए मथुरा की कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी गई है।

वादी महेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर मथुरा की सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट सुनवाई करेगा या नहीं, अभी तक कोर्ट ने इस मामले में कोर्ट ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी याचिका में कोर्ट से अपील की है कि अगर वक्त रहते विवादित ईदगाह मस्जिद परिसर को सील नहीं किया गया तो गर्भगृह और साथ में मंदिर के पुरातात्विक अवशेष को क्षतिग्रस्त किया जा सकता है या फिर उन्हें वहां से हटाया जा सकता है।

याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने याचिका में कहा, “ज्ञानवापी मस्जिद में जिस तरह से हिंदू शिवलिंग अवशेष मिले हैं, उससे स्थिति स्पष्ट हो गई कि वहां मुस्लिम पक्ष शुरू से ही इस कारण ही विरोध कर रहे थे। लगभग वैसी ही स्थिति श्रीकृष्ण जन्म भूमि की है, जहां असली गर्भगृह है। वहां पर सभी हिंदू धार्मिक अवशेष जैसे कमल, शेषनाग, ऊं, स्वास्तिक आदि हिंदू धार्मिक चिन्हों और अवशेषों को मिटा दिया गया है।”

याचिका में आगे यह तक कहा गया है, “अगर हिंदू अवशेषों को मिटा दिया तो करेक्टर ऑफ प्रॉपर्टी चेंज हो जाएगा और वादी वहां भी प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए अपना हक जताएंगे। ऐसी स्थिति में। मथुरा के ईदगाह मस्जिद में
पूरे परिसर को सील कर दिया,या फिर वहां आना-जाना प्रतिबंधित करके परिसर की उचित सुरक्षा की जाए।”

वहीं ज्ञानवापी मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि ज्ञानवापी परिसर में जहां शिवलिंग मिला है, उस जगह को सुरक्षित रखा जाए, लेकिन इसके साथ ही मुस्लिम लोगों को मस्जिद में नमाज पढ़ने की छूट है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख दी है।

इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने मांग की कि मथुरा के शाही ईदगाह (जहां भगवान कृष्ण के मंदिर का मूल गर्भ गृह है) को सील करें और परिसर के लिए सुरक्षाधिकारी नियुक्त करें। इसके साथ ही प्रशासन को यह आदेश भी दिया गया है, कि ईदगाह मस्जिद में मौजूद प्राचीन हिंदू धार्मिक चिन्हों, स्वास्तिक, कमल, ऊं और अन्य कलाकृतियों को नष्ट होने से बचाएं।

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