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अमेरिका में बनेगा विशाल जिनालय |

वाइटहाउस से 30 किमी दूर बन रहा जैन धर्म के चारों अंगों का मंदिर, यह भारत के बाहर जैन धर्म का सबसे बड़ा आस्थास्थल|

अमेरिका के वॉशिंगटन में वाइटहाउस से 30 किमी दूर जैन धर्म का नया आस्था केंद्र बन रहा है। यह भारत के बाहर सबसे बड़ा जैन धर्मस्थल होगा। यहां जैन समाज के चारों अंगों श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी और तेरापंथी के मंदिर एक साथ होंगे। यह दिसंबर तक तैयार होगा। निर्माण से जुड़े रितेश शाह ने बताया- मंदिर 6 एकड़ में 150 करोड़ की लागत से बन रहा है। यहां 24 पावन विग्रह होंगे। प्रतिमाएं भारत में बन रही हैं, जो चार्टर्ड प्लेन से अमेरिका पहुंचेंगी। मंदिर में लगने वाला मार्बल भी 60 कंटेनर में भारत से पहुंचेगा। भारत से जाएंगी प्रतिमाएँ ।इस अवसर पर आचार्य प्रवर पद्मसागरसूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति बहुत प्राचीन संस्कृति है और यहां के मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विशेष महत्व है। भारत में कई लोग आए – गए और भारत ने उदारतापूर्वक सभी को अपने मठ स्थापित करने की अनुमति दी, लेकिन विदेशों में भारत के पास जो ऐतिहासिक विरासत है, उसे लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए अमरीका पर एक विशाल जिनालय बनाया जा रहा है ।

धर्मस्थल के साथ – साथ यहाँ 24000 फीट के धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक परिसर भी तैयार किए जाएंगे। स्टेशन, रिसॉर्ट और गौरवशाली इतिहास सहित कक्षा और पुस्तकालय के लिए विशेष व्यवस्था भी की जाएगी |

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