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देश में बच्चा गोद लेने कि प्रक्रिया है बेहद जटिल, लोग हो जाते है पीछे ।

देश में करीब 3 करोड़ अनाथ बच्चे हैं। और इन आकडों को कम करने तथा गोद लेने की प्रोसेस, कागज़ी कार्यवाही तथा नियम है बहुत सख़्त । प्रक्रिया भी बहुत लंबी व मुश्किल है, जिसके कारण बहुत सारे लोग बच्चा गोद लेने में झिझकते हैं।

इसी मुद्दे को सामने लाए है ‘टेंपल ऑफ हीलिंग’ नई दिल्ली (Temple of Healing, New Delhi) के NGO से वकील पीयूष सक्सेना, जिनका मानना है कि कानूनों में थोड़ी ढील की ज़रूरत है और प्रक्रियाओं को सरल बनाने कि कोशिश की जानी चाहिए।

क्यों है प्रक्रिया मुश्किल :

जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना है, नियम इसलिए कड़े व सख्त है ताकी बच्चों का शोषण होने से बचाया जा सके, उन्हें किसी भी तरह की शारीरिक व मानसिक तकलीफें व टार्चर न सहना पड़े, इसका ध्यान रखते हुए तथा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित (Safe) व सेक्कोर (Secure) रखा जा सके । इसलिए नियमों व कानूनों में सख्ती बरतनी होगी ।जो कि लाज़मी है।
                                भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया :

बच्चा गोद लेने के लिए कारा( महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन सेन्ट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथारिटी) के नोडल अधिकारी को आवेदन देना होता है और अन्य दस्तावेज व प्रमाण जमा करना होता है । :-

2) इच्छुक दंपती को कई तरह के दस्तावेज़ जैसे :     

(i) परिवार की तस्वीर (ii) पैन कार्ड
(iii) निवास प्रमाण पत्र
(iv) आयकर रिटर्न की कॉपी
(v) शादि का प्रणाम पत्र
(vi) परिवार में पहले से बच्चे हैं, तो नए बच्चे को गोद लेने के लिए जैविक बच्चों की सहमति भी ज़रूरी ।
(vii) दंपती को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक स्थिति को दर्शाने वाले आदि दस्तावेज़।
viii) दंपती को अगर कोई प्रकार की जानलेवा बीमारी हो तो उसका रिकार्ड भी देना होगा ।

*अगर कोई सिंगल पेरंट है, तो तलाक का विवरण और उससे जुड़े दो लोगों के बयान लिए जाते हैं।

यह सब कागज़ी दस्तावेजों से इसलिए गुज़रना पड़ता है, ताकि अनाथ बच्चे यौन शोषण, मानव तस्करी, भीख मंगवाने या अंग बेचने जैसे आदि गंभीर अपराधों का शिकार न बनें ।

किस प्रकार प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है ?

1) बच्चों का डेटाबेस के आधार पर एक एप (App) निर्मित किया जाना चाहिए।

2)फालतू व बार-बार एक ही प्रकार की जानकारी के लिए, अलग-अलग  तरह के कागज़ नहीं मांगने चाहिए।

3) सरकार को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल कुछ प्रणाम पत्रों से किसी व्यक्ति को नहीं आका जा सकता है और इसलिए उन्हें मानवीय आधार पर भी कुछ कार्य करने चाहिए और एक्सन लेना चाहिए।

इन सब मामलों व मुद्दों को मध्यनज़र रखते हुए केंद्र सरकार क्या फैसला लेती है, ये उनके हाथ में हैं।

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