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तालिबान पर भारत का बदला बदला अंदाज….

तालिबान पर भारत का बदला बदला अंदाज


वर्ष 1996 से लेकर 2021 तक भारत अफगानिस्तान में लोकतंत्र का समर्थक और तालिबान का विरोधी रहा था. लेकिन अब देख कर ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान को लेकर भारत अपनी नीति में बदलाव ला रहा है. जून 22 2022 को तजाकिस्तान में हमारे एनएसए अजीत डोभाल ने यह है कहा था कि अफगानिस्तान के जितने भी पड़ोसी देश है उनको अफगानिस्तान की मदद करना चाहिए आतंकवाद से लड़ने के लिए. अजीत डोभाल का यह बयान क्या भारत की कमजोरी को दर्शाता है. जी नहीं यह भारत की कमजोरी को नहीं दर्शाता है बल्कि 1 तरीके से देखा जाए तो अजीत डोभाल ने तालिबान के उस बयान का जवाब दिया जिसमें तालिबान ने यह कहा था कि वह अफगानिस्तान की मिट्टी को भारत के खिलाफ आतंकवाद में इस्तेमाल नहीं होने देगा.

अजीत डोभाल का यह बयान से यह साफ हो गया कि अफगानिस्तान को लेकर भारत की नीति पूरी तरह अब बदलने वाली है. इसी के साथ हम को भारत की पुट डिप्लोमेसी भी देखने को मिली. भारत ने अफगानिस्तान को गेहूं भेजा वह भी पाकिस्तान के रास्ते से. भारत ने आखिर गेहूं बेचने के लिए पाकिस्तान का रास्ता क्यों चुना ? यह भी काफी रोचक है. विदेश नीति में हर चीजों के मायने होते हैं और अफगानिस्तान में गेहूं पाकिस्तान के रास्ते भेजने के भी कई मायने हो सकते हैं.

भारत को यह बहुत अच्छे से पता था अगर भारत अफगानिस्तान को गेहूं पाकिस्तान के रास्ते भिजवा ता है तो पाकिस्तान इसका विरोध करेगा और पाकिस्तान ने किया भी यही और जब पाकिस्तान ने इसका विरोध किया तो तालिबान ने पाकिस्तान को चेताया अगर उसने जो भी अनाज अफगानिस्तान आ रहा है भारत से उसका रास्ता अगर पाकिस्तान ने नहीं दिया तो परिणाम बुरे होंगे. यहीं से तालिबान और पाकिस्तान के रिश्तो में धीरे-धीरे हटा थाना भी चालू हो गई.


कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा में आपको अपने दुश्मन की मानसिकता का पता होना बहुत आवश्यक होता है. और अफगानिस्तान में अनाज पाकिस्तान के रास्ते भेजने वाले चाल से भारत ने यह साबित भी किया. भारत ने जो अनाज अफगानिस्तान भेजा इससे भारत को एक और फायदा हुआ तालिबान इस बात को मान गया कि पाकिस्तान में चल रहे जैसे लसकर जैसे आतंकी संगठनों के कैंप की गतिविधियों की जानकारी तालिबान भारत को देगा. तालिबान और पाकिस्तान के रिश्तो में आई खटास का एक पुख्ता सबूत यह है कि तहरीक-ए-तालिबान ने लगातार पाकिस्तानी फौज पर हमले जुलाई से तेज कर दिए हैं.

एक बात और देखने को मिली है कि यह तालिबान पहले से परिपक्व हुआ है. इनकी नीतियों से यह साफ जाहिर होता है कि यह संसाधनों और मदद के लिए सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान और चीन पर निर्भर नहीं रहेंगे. यह रूस और भारत जैसे देशों का भी रुख कर सकते हैं. इस बात को यह साबित करता है एक कि अफगानिस्तान में यह इंटरेस्ट दिखाया कि वह चाहेंगे कि उनके मिलिट्री कैडर भारत में ट्रेन हो. इस पर भारत ने सहमति जता दी और कुछ अफगान डिफेंस ऑफिसर्स को ट्रेनिंग भी दी.
इससे भी यह साफ जाहिर हो रहा है कि भारत ने भी तालिबान को लेकर अपनी नीति पूरी तरह बदल दी है. भारत अब एक राष्ट्र के तौर पर हर जगह अपने हित साधने पर ध्यान दे रहा है. भारत यह कोशिश कर रहा है कि उसके नेशनल इंटरेस्ट हर जगह पहले हो जिससे उसे और उसके देश के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान हो और देश की प्रगति हो.

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