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चौधरी भजनलाल ने दी विश्नोई समाज को एक नई पहचान- धनखड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बिगड़ते पर्यावरण संतुलन पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर गुरु जंभेश्वर जी की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार देश-विदेश में हुआ होता तो आज विश्व इस तरह से प्रकृति के प्रकोप का सामना नहीं कर रहा होता। धनखड़ ने संत गुरु जम्भेश्वर जी की शिक्षाओं को भारत और विश्व में फैलाने पर भी जोर दिया।

बीकानेर में मुक्ति धाम मुकाम में अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा द्वारा आयोजित अधिवेशन को उपराष्ट्रपति ने संबोधित किया । इस अवसर पर उन्होंने ‘बिश्नोई रत्न’ चौधरी भजनलाल जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया। धनखड़ ने कहा कि “आज से 550 वर्ष पूर्व कोई सोचता भी नहीं था कि पर्यावरण का संतुलन इस तरह से बिगड़ेगा। व्यक्ति अपने लालच के अंदर इस तरह से प्रकृति का दोहन करेगा। आज पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि इसीलिए कर रही है क्योंकि उन्होंने गुरु जंभेश्वर जी की बात को नहीं माना।”

गुरु जंभेश्वर जी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज से 550 वर्ष पूर्व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर उन्होंने मानव-प्रकृति के बीच समन्वय और सौहार्द का रास्ता दिखाया था।

चौधरी भजनलाल जी के योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे आजीवन किसान और कमेरा वर्ग की सशक्त आवाज़ रहे। उन्होंने विश्नोई समाज को एक नई पहचान दी और गुरु जंभेश्वर जी की शिक्षाओं के प्रचार के लिए विश्वविद्यालय बनाया। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि “मुक्ति धाम मुकाम में चौधरी भजन लाल जी प्रतिमा से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।”

धनखड़ ने गुरु जम्भेश्वर भगवान के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल मुकाम में उनकी समाधि के दर्शन कर प्रार्थना की और मुक्तिधाम मुकाम निज मंदिर के सौंदर्यीकरण और नवनिर्मित मंच का लोकार्पण भी किया। तत्पश्चात अखिल भारतीय विश्नोई समाज द्वारा माननीय उपराष्ट्रपति जी का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जी ने अभिभूत स्वर में कहा “मैं आज अपने परिवार के बीच में आ गया हूं। हम सब के पुरखे एक ही थे और सदियों से हम एक है। यह हमारी पहचान है।”

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