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महाराष्ट्र प्रान्त से लेकर सम्पूर्ण भारत वर्ष में हर्षोल्लास से मनाया गया गणेशोत्सव

रिपोर्ट राजा अवस्थी

सभी देवों में प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी का ये महानपर्व महाराष्ट्र प्रान्त से प्रारंभ होकर आज पूरे भारत वर्ष में सभी सनातनी भक्तो द्वारा बड़ी सच्ची श्रद्धा, आस्था और पूरे हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान गणेश के इस महान उत्सव को गणेशोत्सव के नाम से जाना जाता है। उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी को भगवान श्री गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है।
पं० सत्यम विष्णु अवस्थी ने बताया कि हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में 15 – 15 दिनों के दो पक्ष होते हैं पहला कृष्ण पक्ष तथा दूसरा शुक्ल पक्ष और प्रत्येक पक्ष में एक एक चतुर्थी तिथि आती है व चतुर्थी तिथि भगवान गणेश से संबंधित होती है इसीलिए कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को वैनायकी गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। भगवान गणेश का यह महान पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर इसी भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि तक चलता है यानि ये गणेशोत्सव 10 दिन तक चलता है। यह महोत्सव भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप मनाया जाता है।
इस वर्ष ये गणेश महोत्सव 31 अगस्त 2022 दिन बुधवार को प्रारम्भ होगा। चूंकि बुधवार का दिन भी भगवान गणेश को ही समर्पित होता है इसलिए इस वर्ष चतुर्थी तिथि के साथ बुधवार का ये संयोग बहुत दुर्लभ संयोग है। पं० सत्यम विष्णु अवस्थी ने बताया कि पौराणिक कथा के मुताबिक महर्षि वेदव्यास जी ने भगवान गणेश जी से महाभारत की रचना को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की थी, जिसके बाद गणेश चतुर्थी के दिन ही व्यास जी ने श्लोक बोलना और गणेश जी ने उसे लिपिबद्ध करना शुरू किया था, बिना रूके 10 दिन तक लगातार लेखन किया और 10 दिनों में गणेश जी पर धूल-मिट्टी की परत चढ़ गई। गणेश जी ने इस परत को साफ करने के लिए 11 वें दिन सरस्वती नदी में स्नान किया और इस दिन चतुर्दशी तिथि थी। इसी कारण यह दिन गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश बुद्धि के दाता है। आज के दिन प्रत्येक भक्त भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करके उनकी विधिवत पूजा करते हैं उनको कुमकुम और अक्षत अर्पित करते हैं। गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है इसलिए गणेश जी को मुख्य रूप से दूर्वा तथा दूर्वा की माला चढ़ाई जाती है। इसके बाद भोग लगाया जाता है भोग में गणेश जी को मोदक प्रिय होते हैं। गणेश जी की उपासना में गणेश अथर्वशीर्ष का बहुत अधिक महत्व है। इसे रोजाना पढ़ा जाता है इससे बुद्धि का विकास होता है। यह मुख्य रूप से शांति पाठ है।

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