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मां ने घरों मेंं किया काम, बेटे ने अखबार बांट चखा सफलता का स्‍वाद

कोचिंग व किताबों के लिए नहीं थे पैसे तो नि:शुल्‍क शैक्षणिक संस्‍था अविरल धारा बनी सहारा

न्यूजी वर्ड आकाश दीप अलीगढ़ :आगाज में शोर की क्या जरूरत, अंजाम तेरा घनघोर होना चाहिए, तू अकेला प्रारंभ में क्‍या-क्‍या सहेगा, अंत ऐसा हो कि चर्चा चारो ओर होनी चाहिए, किसी कवि की यह पंक्तियां यूपी के अलीगढ़ निवासी मोहित कुमार पर सटीक बैठती हैं। इनकी चर्चा आज इनके गली-मोहल्‍ले सहित पूरे जनपद में व आसपास पास के लोगों में है। कहने को तो उन्होंने सिर्फ बैंक क्लर्क की ही परीक्षा पास की है लेकिन मोहित का जज्‍बा-हौंसला, हिम्मत सभी के लिए चर्चा का विषय और मार्गदर्शक बन गई है।
मैं आकाशदीप भारद्वाज संपादक न्‍यूजी वर्ड आज आपको मिलवाता हूं ऐसी ही संघर्ष के स्‍त्रोत अलीगढ़ के राज विहार कालोनी निवासी मोहित कुमार से। यह अपने पिता राकेश सिंह के तीन बेटों में से उनके बीच के पुत्र हैं। तीनों बेटों में मोहित में शुरु से ही कुछ अलग करने का जज्बा था। पढ़ाई में होशियार मोहित ने सफलता का स्वाद भी यूं ही नहीं चखा बल्कि इस सफलता के पीछे उनके कई दौर के संघर्ष की कहानी है। अलीगढ़ शहर के सामाजिक एवं नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान अविरल धारा के संस्थापक अतुल सिंह के नेतृत्व में मोहित नाम के बीज को पौधा बनाने के लिए सींचा गया। यहां से जीवन के कई संघर्ष व मूल्यों को ग्रहण कर मोहित ने अपनी सफलता की यात्रा शुरु की। सरकारी नौकरी पाने का सपना संजोए सभी परीक्षार्थियों की तरह मोहित यहां चाहे सर्दी की कड़कड़ाती ठंड हो या गर्मी का सामान्य मौसम हर अनुकूल व प्रतिकूल परिस्थिति में यहां पढ़ने के लिए समय से पहुंचते थे। इस संस्था में काफी वर्ष पढ़ाई की। पिता पेशे से ड्राइवर व मां सामान्य रूप से गृहिणी थीं ऐसे में तीन बच्चों की पढ़ाई एवं बिटिया की शादी व पढ़ाई को बोझ पहले से ही माता-पिता को चिता में डाले हुए था। माता-पिता ने स्वयं संघर्ष करते हुए दूसरे घरों में घरेलू काम किया और स्वयं मोहित ने रोजाना साइकिल से अखबार डाले और अपना जेब खर्च व घर का कुछ खर्च उठाया। मोहित बैंक परीक्षा के लिए करीब 05 से 06 बार प्रयास कर चुके हैं लेकिन उन्हें सफलता के बहुत नजदीक पहुंचकर संतोष करना पड़ता था।
मोहित ने बताया कि कई बार ऐसा समय आया कि वह टूट गए और सब-कुछ छोड़कर घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए कहीं भी मजदूरी व अन्य कार्य करने का निर्णय कर चुके थे लेकिन माता-पिता व अविरल धारा के संस्थापक ने उन्हें फिर से अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और जब पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी तो यह नववर्ष की सुबह मोहित के लिए भी हर्ष व उल्‍लास लेकर आई। 31 दिसंबर को मोहित ने देर रात अपना रिजल्‍ट देखा तो सफलता उनके कदमों में थी। मोहित का जज्बा व हौसला आज बैंक की परीक्षा की तैयारी करने वाले सभी अथ्‍यर्थियों के प्रेरणादायी बन गया है कि किस प्रकार अभाव में रहकर भी अपनी नियति से बिना शिकायत किए सफलता पाई जा सकती है।
मोहित की मां पार्वती देवी ने बताया कि अब संघर्ष का एक दौर खत्‍म होने से थोड़ी राहत मिलेगी अब उम्‍मीद है कि बेटी की शादी भी अच्छे से कर पाएंगे। पिता राकेश कुमार ने बताया कि बेटे के सफल होने की खुशी उतनी है जितनी बेटा पैदा होने के समय थी। मैं मोहित जैसे अपने सभी बेटों के सफल होने की कामना ईश्वर से करता हूं।

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