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सिरौली में पहली बार तशरीफ़ लाए जमात रजा-ए-मुस्तफा के उपाध्यक्ष, सलमान हसन खां

संवाददाता अदनान खान

सलमान मियां के चाहने वालों ने कड़कती धूप में डीआरएम इंटर कॉलेज पर किया दो घंटे इंतजार

सिरौली। आला हजरत के संगठन जमात रज़ा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यूं कहें काजी-ए-हिंदुस्तान और दरगाह ताजुश्शरिया (अजहरी मियां) के सज्जादानशीन मुफ्ती असजद रज़ा क़ादरी के दामाद सलमान हसन खां पहली बार सिरौली तशरीफ़ लाए जहां सलमान मियां के इस्तकबाल के लिए नगर की अवाम सैकड़ों बाइको से सलमान मियां का इस्तकबाल करने पहुंची जहां उन्हें कड़कती धूप में डीआरएम इंटर कॉलेज पर लगभग दो घंटे सलमान मियां का इंतजार करना पड़ा, सलमान मियां का कफीला बाइक कारों व नारों की गूंज के साथ डीआरएम इंटर कॉलेज से लेकर मोहल्ला प्यास, हाफीज़ नज़ीर अहमद शेरी के मदरसे दरगाह कुतुब साहब, मोहल्ला मुगलान, मेन मार्केट होते हुए क़ाज़ी टोला पहुंचा क्या है पूरा मामला कि सलमान हसन खां जमात रजा ए मुस्तफा के उपाध्यक्ष हैं और सिरौली में जमात रजा ए मुस्तफा की ब्रांच क़ायम करने के ताल्लुक से नगर के मोहल्ला क़ाज़ी टोला की नूरी मस्जिद में तशरीफ़ लाए जहां उन्होंने जमात रजा ए मुस्तफा के बारे में जिक्र करते हुए सिरौली में जमात रजा ए मुस्तफा की नींव रखी, साथ ही उर्स ए आला हजरत की दावत देते हुए कहा कि बरेली सिटी स्टेशन से लेकर मदरसा जामियातुल रज़ा तक किरया फ़्री रहेंगा‌ सिरौली आने से पहले सलमान मियां का प्रोग्राम अलीगंज व खे़लम में था इस वजह से उन्हें सिरौली आने में देर हुई सलमान मियां ने असर की नमाज अब्बासियो वाली मस्जिद में अदा की जिसके बाद वापस बरेली को रवाना हुए, तकरीर के दौरान बताया गया कि उर्स ए आला हजरत के बाद काजी-ए-हिंदुस्तान और दरगाह ताजुश्शरिया (अजहरी मियां) के सज्जादानशीन मुफ्ती असजद रजा क़ादरी सिरौली की सरजमीं पर तशरीफ़ लाएंगे साथ ही कहा कि सलमान हसन खां शासनिक, प्रशासनिक, मामले, मुकदमा दारी‌ से लेकर जमात रज़ा ए मुस्तफा, मदरसा, दरगाह हर मामले में आगे रहते हैं।

जमात रज़ा ए मुस्तफा:- आला इमाम अहमद रज़ा खां फ़ाज़िल-ए-बरेलवी ने जमात रज़ा ए मुस्तफा कायम की एक आला दर्जें की तहरीक है। आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां फ़ाज़िल-ए-बरेलवी ने मुस्लिमों को धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत और ताकतवर बनाने के लिए इसकी स्थापना की। इस संगठन का साफ मकसद है गुमराह फिरक़ो को नकारना और मुस्लिम इतेमाद की रक्षा करना है। इस तहरीक की कमाल कामयाबी के पीछे कुछ सबसे अहम शख्सियत जैसे हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मद हामिद रजा खान, मुफ्ती ए आजम ए हिंद मुहम्मद मुस्तफा रजा खान, सदरूश्शरिया मुफ्ती अमजद अली आज़मी, शेरअहले सुन्नत हशमत अली खान और सदरुल अफज़िल सैय्यद मुहम्मद नईमुद्दीन मुरादाबादी हैं जमात रज़ा ए मुस्तफा इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 7 रबीउल सानी 1339 हिजरी को बनी थी इस तरह इसके 105 बरस पूरे हो गए हैं, लेकिन अंग्रेजी तारीख में इसका गठन 1920 में हुआ है तो अंग्रेजी लिहाज से 101 बरस होते हैं

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