विकास की चकाचौंध से दूर अमरोहा जनपद के गंगेश्वरी ब्लॉक के गांवों में विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। ग्राम पंचायतों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण आज ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सबसे बदतर स्थिति गांव के मुख्य मार्गों की है, जो जलभराव और गंदगी के कारण तालाब में तब्दील हो चुके हैं।

शिक्षा और संपर्क मार्ग दोनों प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार, जिस रास्ते पर घुटनों तक पानी और कीचड़ भरा है, वही गांव का मुख्य मार्ग है। इसी रास्ते से होकर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे गुजरते हैं, जिनके लिए हर दिन स्कूल पहुंचना एक अग्निपरीक्षा बन गया है। गौरतलब है कि यही मार्ग गांव को तहसील हसनपुर से भी जोड़ता है, लेकिन बदहाली के कारण तहसील तक का सफर भी दूभर हो गया है।
ग्राम प्रधान का पल्ला झाड़ने वाला रवैया
जब इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान से सवाल किए गए, तो उन्होंने जिम्मेदारी लेने के बजाय सारा दोष ग्रामीणों पर ही मढ़ दिया। प्रधान ने जनसमस्याओं को गोलमोल करते हुए दो टूक कहा कि,
“पंचायत के पास बजट नहीं है।”
“यह काम विधायक निधि के अंतर्गत आता है, मेरा नहीं।”
हैरानी की बात तब हुई जब न्यूजीबर्ड (Newsbird) की मीडिया टीम ने प्रधान को उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के दावों की पड़ताल के लिए गांव का दौरा करने की चुनौती दी। ग्रामप्रधान ने मीडिया के साथ गांव जाने से साफ इनकार कर दिया, जिससे उनके विकास के दावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
‘हसनपुर’ से चल रही सरकार, ग्रामीण बेहाल
ग्रामीणों ने प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि चुनाव जीतने के बाद प्रधान गांव में रहते ही नहीं हैं।
“हमारे प्रधान जी तो हसनपुर में रहते हैं। गांव की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। जब मुख्य व्यक्ति ही गांव में मौजूद नहीं रहेगा, तो विकास की उम्मीद किससे करें?”
हाशिए पर खड़े गरीब परिवार
गांवों की तंग गलियों में आज भी ऐसे कई परिवार मौजूद हैं, जिनके सिर पर पक्की छत तक नहीं है। मिट्टी के कच्चे घर और पॉलीथिन व फूस की झोपड़ियों में गुजर-बसर कर रहे इन ग्रामीण गरीब परिवारों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, “हम गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं है।”
गरीबों के निवाले पर भी यहाँ डाका डाला जा रहा है। ग्रामीणों ने न्यूजीबर्ड को बताया कि राशन डीलर प्रति यूनिट 5 किलो के बजाय केवल 4 किलो राशन दे रहे हैं। विरोध करने वालों को डराया जाता है, जबकि चहेतों को पूरा राशन मिलता है।
जब न्यूजीबर्ड जर्नलिस्ट ने राशन डीलरों से इस कटौती का आधार पूछा, तो उन्होंने जो खुलासा किया वह पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा करता है:
“हमें ऊपर के अधिकारियों को भारी कमीशन देना पड़ता है। हम अकेले ऐसा नहीं कर रहे, आसपास के सभी गांवों और पूरे यूपी में यही हाल है।”
यह बयान सीधे तौर पर आपूर्ति विभाग और ब्लॉक प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
भ्रष्टाचार की बू और जर्जर हालात
गांवों की जर्जर होती हालत चीख-चीख कर भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। नालियों की सफाई न होना, सड़कों का निर्माण न होना, जरूरतमंदों को प्रधानमंत्री आवास न मिलना, राशन में कटौती होना, यह दर्शाता है कि सरकारी धन का बंदरबांट किस स्तर पर हो रहा है।
स्थिति देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ‘लोकतंत्र’ का लाभ केवल रसूखदारों तक सीमित है?
न्यूजीबर्ड (NewsyBird) की पड़ताल में सामने आया है कि यहाँ गरीब और गरीब होता जा रहा है, और व्यवस्था को चला रहे जिम्मेदार अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।
बदहाली और भ्रष्टाचार को लेकर क्षेत्र के विधायक और ब्लॉक प्रमुख की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं:
सवालों के घेरे में विधायक: जिस मुख्य मार्ग से स्कूल के बच्चे और तहसील जाने वाले लोग गुजरते हैं, वह महीनों से जलमग्न है। विधायक जी ने अपनी निधि का इस्तेमाल इन बुनियादी ढांचों के लिए क्यों नहीं किया?
क्या जनता का वोट केवल चुनाव तक ही सीमित था?
ब्लॉक प्रमुख की अनदेखी: ब्लॉक प्रमुख का काम ग्राम पंचायतों की निगरानी करना है। क्या उन्हें यह भ्रष्टाचार नहीं दिखता? क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा केवल कागजों तक सीमित है?
जवाबदेही किसकी?
प्रधान कहते हैं बजट नहीं है और मुख्यमार्ग का काम विधायक जी के अंतर्गत आता है। विधायक और ब्लॉक प्रमुख ने इस क्षेत्र को किसके हाल पर छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बड़ी योजनाओं का लाभ इन पात्रों तक क्यों नहीं पहुँचा? क्या ब्लॉक प्रमुख और क्षेत्रीय विधायक ने कभी इन झोपड़ियों की सुध ली?
क्या यह जनता के साथ विश्वासघात नहीं है?
गंगेश्वरी की ग्राम पंचायतों की गलियों में बहता कीचड़ और गरीबों की आंखों के आंसू इस बात का प्रमाण हैं कि यहाँ का प्रशासन और जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी भूल चुके हैं। राशन की चोरी से लेकर सड़कों की बदहाली तक, हर जगह एक संगठित भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
लम्बे समय से गांवों की जर्जर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने कहा है कि वे अब तालमटोल और गोलमोल बातों के रवैया से तंग आ चुके हैं। इसलिए अब जिला प्रशासन से मांग की है कि गंगेश्वरी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और ग्राम पंचायतों की एक एक समस्या का तत्काल निस्तारण किया जाए।
Reported by : Shailendra Pratap Singh