जम्मू‑कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने कहा कि पार्टी के भीतर नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन को लेकर उठ रही असंतोष की आवाज़ को ‘ज्यादा गंभीरता से’ नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने मंगलवार को स्पष्ट करते हुए बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, हालांकि कुछ नेताओं ने अपनी चिंताएं आलाकमान के सामने रखी हैं।
कर्रा ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी ने इस मामले पर अब तक कोई चर्चा नहीं की है। यदि आगे चर्चा की आवश्यकता महसूस हुई तो इसे कार्यकारी समिति के सामने लाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं बनाई गई है। उन्होंने बताया कि यह चर्चा अप्रैल में आयोजित दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुई, जब जम्मू‑कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के जिला अध्यक्षों ने राहुल गांधी से संगठन को मजबूत करने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बात की थी।
उन्होंने कहा, “जब राहुल जी 30 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में कार्यशाला में गए, तो उन्होंने विभिन्न राज्यों के जिला अध्यक्षों से अलग‑अलग बातचीत की और उनसे संगठन को आगे बढ़ाने में आने वाली परेशानियों के बारे में पूछा।” इस दौरान कुछ जिला अध्यक्षों ने व्यक्त किया कि यदि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती तो शायद परिणाम बेहतर होते। कर्रा ने इस धारणा को स्वीकार करते हुए कहा कि यह लोगों की आम राय है, लेकिन फिलहाल पार्टी का ध्यान गठबंधन के भविष्य पर कोई शीघ्र निर्णय लेने पर नहीं है।
पिछले दिनों जम्मू जिला ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष नीरज कुंदन ने दावा किया था कि लगभग 19 जिला अध्यक्षों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में हुई बैठक में पार्टी आलाकमान से नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। कर्रा ने इन दावों को भी तथ्यात्मक रूप से रखा, लेकिन किसी भी प्रकार के निर्णय को अभी टाल दिया गया है।