चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. 21 मई को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जा रहा है. इस विशेष अवसर पर चाय उद्योग से जुड़े करियर विकल्प भी चर्चा में हैं, जिनमें से एक है प्रोफेशनल टी-टेस्टर का पेशा.
टी-टेस्टर का काम क्या होता है?
टी-टेस्टर की जिम्मेदारी सिर्फ चाय पीने तक सीमित नहीं है. उन्हें चाय पत्तियों की गुणवत्ता, सुगंध, रंग और स्वाद को बारीकी से परखना पड़ता है. इसके अलावा वे नई चाय ब्लेंड विकसित करने, बाजार के रुझानों को समझने और उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं के अनुसार स्वाद चुनने का काम भी करते हैं. बड़ी चाय कंपनियों और निर्यात उद्योग में टी-टेस्टर्स की भूमिका काफी अहम होती है.
कौन‑सा कोर्स करना फायदेमंद?
टी-टेस्टर बनने के लिए कोई एक निर्धारित डिग्री अनिवार्य नहीं है, लेकिन फूड साइंस, कृषि, वनस्पति विज्ञान या आतिथ्य प्रबंधन से संबंधित कोर्स बहुत मददगार साबित होते हैं. भारत में कई संस्थान चाय टेस्टिंग और मैनेजमेंट से जुड़े सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स प्रदान करते हैं. सिलीगुड़ी स्थित कुछ संस्थानों में तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध है, जहाँ चाय की पहचान, टेस्टिंग तकनीक और गुणवत्ता जाँच सिखाई जाती है. इसके अलावा इंटरनेशनल टी मास्टर्स एसोसिएशन और यूके टी एकेडमी जैसे विदेशी संस्थान भी ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स चलाते हैं.
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टी-टेस्टर बनने के लिए जरूरी कौशल
इस क्षेत्र में सफल होने के लिए स्वाद और गंध पहचानने की क्षमता सबसे आवश्यक मानी जाती है. साथ ही धैर्य, अवलोकन कौशल, खाद्य परीक्षण की बुनियादी समझ और बाजार ज्ञान भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं, जिनके पास चाय उत्पादन एवं प्रसंस्करण की जानकारी हो.
सैलरी की बात
भारत में टी-टेस्टर के प्रवेश स्तर पर वार्षिक वेतन लगभग तीन लाख से पाँच लाख रुपये तक हो सकता है. अनुभव बढ़ने के साथ यह पैकेज आठ लाख से बारह लाख रुपये तक पहुँच सकता है. बड़ी चाय कंपनियों, निर्यात घरों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स में काम करने वाले अनुभवी टी-टेस्टर्स को इससे भी अधिक compensation मिलता है.
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